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सिक्किम 47 फीसदी हरियाली के साथ देश में अव्वल

नई दिल्ली, 18 अगस्त : हिमालयी पर्वतीय राज्य सिक्किम को उपग्रह डाटा के आधार पर देश में सबसे ज्यादा हरियाली वाला राज्य आंका गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय 21 प्रतिशत वनीकरण के मुकाबले सिक्किम का 47.3 प्रतिशत क्षेत्र वनों के अधीन है।


राज्य के कुल 7,096 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में से राज्य में अब तक 3,359 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को वन के अधीन लाया जा चुका है तथा चालू पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत 3,100 लाख रुपये खर्च करके अतिरिक्त 1,000 हेक्टेयर भूमि को वन के अंतर्गत लाया जाएगा, जिससे राज्य में 50 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्र पौधरोपण के अंतर्गत आ जाएगा।

राज्य में 500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अत्यंत घने, 2,161 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सामान्य घने एवं 698 वर्ग किलोमीटर में खुले वन हैं। वनों के अलावा राज्य का 25 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पेड़-पौधों से ढका है। इस हिमालयी राज्य में वनों के अंतर्गत क्षेत्रफल वर्ष 1993 में 43.95 प्रतिशत था, जो वर्ष 2013 में बढ़कर 47.34 प्रतिशत हो गया।

राज्य का 38 प्रतिशत क्षेत्रफल पार्को, जीव अभयारण्यों, जीव मंडलों तथा संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत लाया गया है, जो देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक है।

राज्य के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने राज्य में हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए 'सिक्किम ग्रीन मिशन', स्मृति वन, 'टेन मिनट टू अर्थ' जैसी अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं, जिनके काफी अच्छे परिणाम सामने आए हैं। राज्य में वनों के बढ़ने से जंगली जानवरों, विलुप्त प्रजातियों, वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं की संख्या में भी अत्यधिक वृद्धि दर्ज की गई है।

राज्य के कुल 7,096 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के मुकाबले 5,841 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को वनों के अधीन रिकार्ड किया गया है। राज्य का 82.31 प्रतिशत क्षेत्रफल वनों के अधीन दर्ज किया गया है। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर मात्र 23.41 प्रतिशत क्षेत्रफल को वनों के अधीन दर्ज किया गया है।

राज्य में पौधरोपण को जन-आंदोलन बनाने के लिए राज्य में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2006 में 'स्टेट ग्रीन मिशन' नामक एक अनोखा कार्यक्रम शुरू किया। इसके अंतर्गत समस्त बंजर एवं खाली भूमि को समाज की सक्रिय भागीदारी की मदद से हरा-भरा करके 'ग्रीन सिक्किम' के लक्ष्य को पूरा करना था। इस कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के विभिन्न हिस्सों में अब तक 45 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं।

चामलिंग ने जून, 2009 में एक अन्य महात्वाकांक्षी कार्यक्रम 'टेन मिनट टू अर्थ' शुरू किया, जिसके अंतर्गत 10 मिनट के अंतराल में राज्य की सम्पूर्ण जनसंख्या ने अपने घरों से निकलकर 6,10,694 पौधे लगाए। यह एक नया विश्व कीर्तिमान था। इस पौधरोपण कार्यक्रम से प्रतिवर्ष 1,400 टन कार्बन डाई ऑक्साइड गैस को पर्यावरण से कम करने में मदद मिल रही है। इस पौधरोपण के लिए वन विभाग ने मुफ्त में पौधे उपलब्ध करवाए।

अब राज्य में प्रत्येक वर्ष 25 जून को राज्य के सभी छह लाख नागरिक 10 मिनट समय पौधरोपण, संरक्षण तथा संवर्धन जैसे कार्यो में लगाते हैं। तथा इस कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रजातियों के 15 लाख पौधे लगाए जाते हैं।

राज्य में वर्ष 2013 में 15 से 30 जून तक पर्यावरण महोत्सव मनाया गया, जिसके अंतर्गत पौधों की विभिन्न प्रजातियों के 2.66 लाख पौधे लगाए गए। राज्य सरकार ने लोगों के प्रियजनों की याद संजोए रखने के लिए 'स्मृति वन' योजना शुरू की है, जिसके अंतर्गत राज्य के 352 हेक्टेयर क्षेत्र में 40 स्मृति वन स्थापित किए गए हैं। राज्य में पिछले 20 वर्षो के दौरान विभिन्न विकास योजनाओं के लिए 800 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया गया। जिसके एवज में 2,000 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर पौधरोपण किया गया।

राज्य में आर्किड की 400 प्रजातियां, 600 प्रजातियों की तितलियां तथा 550 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त राज्य के जंगलों में बर्फीले तेंदुए, रेड पांडा, हिमालयी भालू, कस्तूरी मृग एवं गलहरियों की प्रजातियां पाई जाती हैं।

राज्य का 1,181 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बांस की पैदावार के अंतर्गत आता है। राज्य में 8,87,000 टन बांस की नालें विद्यमान हैं, जिनमें से 7,72,000 टन हरी तथा 1,15,000 टन सूखी हैं।

--IANS

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