भारत India

बाढ़ में तबाह हुआ सपनों का घर

अरविंद मिश्रा, लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश), 18 अगस्त : हर व्यक्ति को जीवन में अपनी कमाई से आशियाना (घर) बनाने का अरमान जरूर होता है। तमाम जतन और वर्षो की कमाई लगाकर वह अपने सपनों की इमारत खड़ी करता है। लेकिन जब उसका आशियाना उसी की आंखों के सामने ढह जाए तो उसके दुख की कल्पना नहीं की जा सकती। उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित लखीमपुर खीरी जिले में प्रीतिंदर सिंह के साथ ऐसा ही हुआ।


लखीमपुर खीरी में मोहाना नदी में आई बाढ़ में सूरजपुर गांव के रहने वाले 65 वर्षीय प्रीतिंदर सिंह का घर पूरी तरह तबाह हो गया। यह घर उन्होंने बड़े अरमानों से करीब 10 साल पहले अपनी पूरी जमा पूंजी लगाकर बनवाया था।

प्रीतिंदर कहते हैं, "मैं फैक्टरी में मुनीम का काम करता था। एक पक्का घर बनवाने का सपना था, जिसमें बच्चों के साथ बुढ़ापा गुजार सकूं। सारी जिंदगी मेहनत से कमाई एक-एक पाई जोड़कर मैंने घर बनवाया, जो बाढ़ में पूरी तरह बर्बाद हो गया।"

वह कहते हैं कि जब उन्होंने अपने आशियाने की एक-एक ईंट को तबाह होते देखा तो उनका कलेजा बैठ गया। अब प्रीतिंदर को समझ में नहीं आ रहा कि इस बर्बादी के लिए वह किसे दोषी ठहराए।

भारत-नेपाल सीमा पर सूरजपुर गांव मोहाना नदी के निकट बसा था, लेकिन इस साल जुलाई में नदी में आई बाढ़ में पूरे गांव का नामोनिशान मिट गया। गांव की आबादी करीब 500 थी और गांव में तकरीबन 80 घर थे।

सूरजपुर गांव के ही 62 वर्षीय एक अन्य ग्रामीण जगजीवन पांडे अपने तीन बच्चों की शादी तो कर चुके हैं, लेकिन बेटी की शादी उन्होंने अगले साल करने की योजना बनाई थी।

उन्होंने कहा, "मैंने सोचा था कि घर में बेटी की शादी का मंडप सजेगा। बारात आएगी। धूमधाम से बेटी को विदा करुं गा, लेकिन अब तो घर ही नहीं रहा। सारे सपने टूट गए।"

प्रीतिंदर, जगजीवन जैसा ही हाल गांव के कई अन्य लोगों का भी है। सभी लोग बाढ़ में अपना आशियाना खो चुके हैं। अब ये लोग बाढ़ पीड़ितों के लिए जिला प्रशासन की तरफ से बनवाए गए अस्थाई शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

सारी जिंदगी की पूंजी लगाने के बाद जिन घरों को इन ग्रामीणों ने बनाया था वो तो तबाह हो गए। अब इन लोगों को प्रशासन से सहारे की उम्मीद है, क्योंकि बिना सरकारी मदद के इन लोगों के सिर पर छत अब शायद ही मयस्सर हो सके।

लखीमपुर खीरी के अपर जिलाधिकारी (राजस्व) विद्याशंकर कहते हैं कि सरकार की तरफ से बाढ़ प्रभावितों की मदद की जा रही है। जिन ग्रामीणों के घर पूरी तरह से बाढ़ में तबाह हो गए हैं, सरकार की तरफ से उन्हें 70 हजार रुपये की मदद दी जाएगी, ताकि अपने लिए वे फिर से घर बनवा सकें।

उन्होंने कहा, "बाढ़ के बाद नदी की धारा बदलने या अन्य कारणों से अगर संबंधित गांव में फिर से बसावट संभव नहीं हो सका तो गांव के हर घर के मुखिया को घर बनाने के लिए कहीं और 250 वर्ग मीटर जमीन दी जाएगी।"

सूरजपुर की तरह उत्तर प्रदेश में कई ऐसे गांव हैं जिनका बाढ़ के चलते नामो निशान ही मिट चुका है। राज्य में इस समय करीब 20 जिलों के सैकड़ों गांव ऐसे हैं जो गंगा, यमुना, घाघरा, शारदा, कर्णाली, मोहाना, सरयू, गंडक, राप्ती नदियों की बाढ़ में तबाह हो गए।

राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में इस साल बाढ़ से 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं तथा करीब 200 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है।

--IANS

भारत India headlines

  • अमेरिकी राजनयिकों के विशेषाधिकार बहाल करने की जल्दबाजी नहीं : खुर्शीद
  • तसलीमा के धारावाहिक का प्रसारण स्थगित
  • अमेरिका को माफी मांगनी होगी : कमलनाथ
  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्मल गंगा जन अभियान शुरु
  • काग्यू मोनलम पूजा को लेकर बोधगया में बौद्घ भिक्षुओं का जमघट
  • अमेरिकी महिला के साथ दुष्कर्म मामले में 3 को सजा
  • उप्र में शीतलहर जारी, यातायात प्रभावित
  • Comments

    Required fields are marked *

    Back to Top